बुधवार, अगस्त 6

 

My mother is a blooming flower,
Whose fragrance fills our home each hour.
She is the joy that softly sings,
The bliss from which our laughter springs.

My mother is a flowing stream,
That carries hopes, that fuels each dream.
She is the strength, the guiding light,
That moves our family through the night.

My mother is a boundless flame,
From which our very life became.
She is the sky, so vast, so wide,
A canopy where we confide.

My mother is the blazing sun,
The source from which all life’s begun.
She is the star whose endless grace,
Creates the cosmos, time, and space.

My mother is the world’s own art,
The soul that shapes our beating heart.
She is the womb, divine, complete,
For which even God admits defeat.


मंगलवार, अगस्त 5

The Symphony of Nature



Come, breathe the breeze, so fresh, so fair,

And wander where the woods declare.



Let streams of life within you flow,

Where Nature’s gifts in silence grow.


How bright the hues, how vast the skies,

Where every dawn a wonder lies.


Apart from her, we cannot stay,

For Nature molds our mortal clay.


The rivers sing in gentle tune,

Their whispers blend with sun and moon.


The gardens shade with tender grace,

Soft petals smile on Nature’s face.


The mountains teach with steadfast will,

Their silent strength, majestic still.


Protect this gift, this sacred trust,

For guard it well, protect we must.


Each leaf, each breeze, a song, a sign—

In Nature’s arms, our souls align.

शुक्रवार, जनवरी 3

जो इंसान चले जाते हैं


पानी को बह जाना है,

किनारे तो कायम रहते हैं।

जो इंसान चले जाते हैं,

वो यादों में हरदम रहते हैं।


उनकी हंसी, उनके बोल,

दिल के कोने में सजीव रहते हैं।

भले ही छूट जाए साथ उनका,

पर एहसास हमेशा रहते हैं।


समय गुजरता है, पर निशां नहीं,

जिनसे दिल जुड़ा, वो दूर नहीं।

दुआओं में वो हरदम शामिल,

जिंदगी में उनकी झलक कहीं।


The waters must flow, they never remain,
While the shores, unchanged, silently sustain.

Those who depart, they’re never gone,
They live in memories, softly drawn.


Their laughter echoes, their words still stay,
Alive in hearts, though far away.

Though their presence may drift from sight,
Their essence lingers, soft and bright.


Time may pass, but marks remain,
When hearts are tied, there's no true pain.

In prayers whispered, they still reside,
In life’s small corners, they gently glide.

मंगलवार, अक्टूबर 19

सुनहरी धूप


 मुझे सुनहरी धूप देखनी है,

मुझे खुली हवा मे सांस लेनी है

मुझे घास पर पड़ी ओस को छूना है

तितलियों के रंगीन पंखो को निहारना है


मुझे जंगल मे चल चल कर थकना है

पेड़ पे चढ कर फल तोड़ कर खाने हैं

मुझे नंगे पांव नदी पार करनी है

दोपहर की गर्मी मे पसीने से तर होना है


उमड़ते बादलों को देख कर खुश होना है

और मस्त हो बारिशों मे नहाना है

किट पतंगो का संगीत सुनना है

दिन ढलने का इन्तजार करना


फिर अन्धेरे से डरना और

चांद तारों मे किसी को खोजना है 

और घर मे मिट्टी के दिये जलाना है

ताकी रोशनी हो सके


और मै सो जाऊं गहरी नींद,

कल सुबह फिर जगने को

क्योकि….

मुझे रोज़ सुनहरी धूप देखनी है,

मुझे रोज़ खुली हवा मे सांस लेनी है॥


जिनकी चकाचौंध ने मुझे, 

मेरे गांव से बड़ा दूर किया

बड़े डरपोक, बड़े बेरहम 

बड़े मतलबी हैं ये शहर


Sonnet: Longing for the Village

I yearn to see the golden sunlight’s glow,
To breathe the air unchained, so pure, so free.
To touch the dew that shines on grass below,
And watch bright wings of butterflies with glee.

Through forest paths I long to wander deep,
To climb a tree and taste its fruit so sweet.
Barefoot, across the river’s waves to leap,
And feel the midday sun’s relentless heat.

To greet the clouds that swell with joy untold,
And bathe beneath the laughter of the rain.
To hear the insects weave their music bold,
And wait till dusk descends with soft refrain.

For city lights have drawn me far away,
Yet cruel, cold hearts can never make me stay.


बुधवार, अक्टूबर 13

मुझे यकीन है,

हमारे तुम्हारे बीच कभी,

जो एक पुल था,

उसे ढहा दिया,

किसी गलत ने

गलती ने या गलतफहमी ने,

और खड़ी कर दी एक दिवार,

पर मुझे यकीन है,

एक दरार आयेगी इस दिवार मे,

और पुल की तरह ये भी टुट जायेगी।


सोमवार, मई 18

फासले

खुशी के धागे मे आंसुओ की लड़ी है।-
जिन्दगी देखो कितनी उलझी पड़ी है।-

खुशियां हैं पर नज़र कम ही आती है
हर खुशी पे गम की परत जो चढी है।-

जाने किस वहम का शिकार है आदमी,
बेगानी खुशी लगती सभी को बड़ी है।-

मीलों के फासले तय करने के वास्ते,

रोज़ी रोटी छोड़ सड़क पर भीड़ उमड़ी है ।-

कभी सियासत कभी कुदरत के हाथों,
मरती यंहा इन्सानियत ही तो हर घड़ी है।-

हकों के लिये नुक्सान भी अपना कर लिया,

कहीं बसें जली तो कंही रेलपटरी उखड़ी है।-







शनिवार, मई 9

अन्धेरों के खिलाफ


जाने कब फूट जाये एक बुलबुला तो है,
जिन्दगी होने-ना होने का सिलसिला तो है

किसी की बरबादियों पर खुश है कोई,
कोई तो वजह है उसे कुछ मिला तो है

जिस्म मरते हैं ख्यालात नही मरा करते,
आज भी सच की राह पे कोई चला तो है 

रात आई तो क्या कभी यंहा दिन ना होगा
लौट आयेगा सूरज,अभी महज़ ढ़ला तो है

हवाओं को खबरदार करो कि रूक जायें,
अन्धेरों के खिलाफ कोई चिराग जला तो है



Who knows when the bubble may burst in the air,
Yet life lingers on — a fragile affair.

Some smile at ruins others have braved,
Perhaps it’s their gain from what someone else paved.

Bodies may perish, but thoughts never die,
Someone still walks where truth dares to lie.

The night has descended — but fear not the gloom,
The sun shall return, it’s just left the room.

Warn the wild winds — let them be still,
A lone flame has risen, defying the chill.


फ़ासले

कभी मिलना जरुरी था हमारी ख़ुशी के लिए /-
अब लाजमी हो गए फासले ज़िंदगी के लिए /-

जिस कुदरत ने बनाया था अपने हाथों से उसे  
उसी  कुदरत से दशहत आ रही आदमी के लिए /-

चाँद तारों को पैरों तले अपने  रौंदने वाला   
अंधेरो से लड़ रहा है अदद रौशनी के लिए /- 

तेरे रॉकेट, तेरे एटम, तेरी ईज़ादकारियाँ 
कुछ काम न आएंगे  तेरी बेबसी के लिए /-

कुदरत के  साथ रह कर समझ लो ज़िंदगी
बड़ी  ख्वाहिशे छोड़ डालो सादगी के लिए /-
 
मुसीबतें आएँगी चली जाएँगी  तारीखें गवाह हैं 
इंसानियत ना खोने देना कभी आमदनी के लिए /-