शुक्रवार, नवंबर 7

दिल

"दिल "
दिल ही है सिने में ,
होता पत्थर तो
धड़कता ना होता,
है तेरी परवाह मुझको ,
वरना मै तडपता ना होता ,
किस्मत का नही कसूर ,
जरूर कुछ ओर बात होगी ,
ना हों सकी तो क्या ,
आज जरूर मुलाकात होगी ,
टूटे दिल को समझा के करो ,
फीर धड़कने के काबिल ,
साथ अगर हम चलेंगे तो ,
दूर नही कोई भी साहिल ....

8 टिप्‍पणियां:

"Arsh" ने कहा…

दिल ही है सिने में ,
होता पत्थर तो
धड़कता ना होता,
है तेरी परवाह मुझको ,
वरना मै तडपता ना होता ,
बहोत ही सुदर गीत के साथ आये आप बहोत बहोत बधाई आपको साहब ...

abhishek ने कहा…

दिल ही है सिने में ,
होता पत्थर तो
धड़कता ना होता,
है तेरी परवाह मुझको ,
वरना मै तडपता ना होता ,
किस्मत का नही कसूर.........

a nice one keep going


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manu ने कहा…

sach hi kaha seene me dil na hota to dhadkan bhi na hoti aur dard aur khushi bhi mahsus na hoti .
a touchy composition,
sath agar pyar ho to koi sahil dur kaise ho sakta hai..........

"अर्श" ने कहा…

kahan ho sahab aajkal ?

Jimmy ने कहा…

bouth he aacha post kiyaa


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Dr. Nazar Mahmood ने कहा…

अच्‍छा लिखा है

abhishek ने कहा…

hey i updated my blog love to have ur comments
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shyam kori 'uday' ने कहा…

किस्मत का नही कसूर ,
जरूर कुछ ओर बात होगी ,
... दमदार पंक्तियाँ हैं।