सोमवार, अप्रैल 18

कितना अधूरापन था ..


तुम मिले तो ये एहसास हुआ,

कितना अधूरापन था, तेरे बगैर।


दिल जब तेरे दिल के पास हुआ,

कितना आवारापन था,तेरे बगैर ।


जिंदगी में जब कभी हताश हुआ

कितना बेगानापन था,तेरे बगैर ।


मुझे मुक्कमल होना रास हुआ ,

कितना अधुरा जीवन था,तेरे बगैर।


तेरे लफ़्ज़ों से लगाव खास हुआ,

कितना बेमानी जीवन था, तेरे बगैर।


मेरे हिस्से का भी मधुमास हुआ,

कितना सुखा उपवन था,तेरे बगैर।

6 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

प्रेमपगे मनोभाव..... सुंदर अभिव्यक्ति.....

seema gupta ने कहा…

दिल जब तेरे दिल के पास हुआ,
कितना आवारापन था,तेरे बगैर ।
" very emotional expressions....the image is unique with your words"
regards

BrijmohanShrivastava ने कहा…

अधूरापन, आवारापन,बेगानापन, था तेरे वगैर ।जीवन बेमानी था और सूखा उपवन था।
मिलन के पश्चात विरह की याद । अच्छे शेर । तेरे वगैर किसी चीज की कमी तो नहीं/ तेरे वगैर तबीयत उदास रहती थी। और अब -तुम आगये हो नूर आगया है।

Sachin Malhotra ने कहा…

बहुत ही बढ़िया लिखा है आपने !

मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - अज्ञान

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

तेरे लफ़्ज़ों से लगाव खास हुआ,
कितना बेमानी जीवन था, तेरे बगैर।

वाह क्या बात है ! बहुत सुन्दर !

Dr Varsha Singh ने कहा…

मेरे हिस्से का भी मधुमास हुआ,
कितना सुखा उपवन था,तेरे बगैर।

भावनाओं का बहुत सुंदर चित्रण . ...बधाई.
चित्र भी बहुत ही खूबसूरत है!