गुरुवार, मई 24

गहरे हो जाएँ रिश्ते



दोस्ती की जब भी कभी बात हुआ करेगी /-
हमारा भी  जिक्र दुनिया कहा सुना करेगी /-

मिलते रहे कदम कदम एक दूजे से हौसले
 घोंसलों से निकले तो  बुलंदियाँ छुआ करेंगी /-

कयामत से कम नहीं अब  जुदाई का ख्याल
हकीकत ये लम्हा लम्हा मुझको डसा करेगी /-

ग्यारह रहे हमेशा हम एक और एक होकर, 
क्या अब भी दोस्ती को ऐसी दुआ रहेगी /

तब्दिले जश्न करते गए मुश्किलों को हम 
रस्मे जश्न कैसे अब यंहा मना  करेगी /

गहरे हो जाएँ रिश्ते दिल के जब अभिन्न 
दूरियाँ  क्या खाक फिर उनको जुदा करेंगी 

2 टिप्‍पणियां:

Raviseema ने कहा…

very good

S.N SHUKLA ने कहा…

सार्थक पोस्ट , आभार.
कृपया मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" पर भी पधारें, प्रतीक्षा है आपकी .