मंगलवार, नवंबर 27

तेरा आना इतिफाक नहीं

मेरे जीवन में तेरा आना ,
अचानक कोई इतिफाक तो नहीं,
ना ही संयोग कोई,
तुम सितारों के जंगल में भटके हिरण तो नहीं
या फिर ओस में नहाये सूरज की किरण तो नहीं
क्या प्रयोजन है इस मिलन का
क्या उद्देश्य है?
मैं तो स्वयं में व्यस्त
बीता रहा था अपना जीवन
फिर क्यों मेरे काव्य सृजन में आये तुम
विराम बन कर।
क्या तुम मेरे लेखन का विषय बनोगे
आओ मैं तुम्हे निहार लूं,
और ..अपनी कलम में उतार लूं,
क्योकि मेरे जीवन में तेरा आना इतिफाक नहीं



 

1 टिप्पणी:

Sriram Roy ने कहा…

सही ख्यालात को बखूबी प्रस्तुत किया है ....सुन्दर