रविवार, जुलाई 5

इरफान हुआ मुझको


मिले तुम की लगा जैसे सब से जुदा हो गया /
तेरा प्यार दर्द हो गया, यही दर्द दवा हो गया /

तेरी चाहत की ही सब मेहरबानियाँ है ये की,
कतरा था मै कतरे से कब का दरिया हो गया /

इरफान हुआ मुझको इक नई रौशनी का जब
ये वजूद मेरा तेरी बाँहों के दरमियाँ हो गया /

दे दिया इन्साफ उसने प्यार की दरखास्त पर
मुझेसिला मिल गया दुनिया का इफ्लाह हो गया /

नक्शा दो जहाँ का देखो, बदल डाला इस इश्क ने
इसमें खुदा इन्सां हो गया ,इन्सां खुदा हो गया /

तेरे आने से ये खाक दिल भी गुलिस्तान हो गया
सज संवर गई ज़िन्दगी अब खौफ हवा हो गया /

एक पत्थर के टुकड़े को,कीमती याकूत बना दिया
तुमने छुआ प्यार से तो, मै क्या से क्या हो गया /
**************************************
याकूत =हीरा
इरफान = ज्ञान
इफ्लाह = भला

11 टिप्‍पणियां:

Puneet Sahalot ने कहा…

"तेरी चाहत की ही सब मेहरबानियाँ है ये की,
कतरा था मै कतरे से कब का दरिया हो गया /"

bahut hi achi lagi ye lines.

seema gupta ने कहा…

नक्शा दो जहाँ का देखो, बदल डाला इस इश्क ने
इसमें खुदा इन्सां हो गया ,इन्सां खुदा हो गया /
" beautiful words..."

regards

RC ने कहा…

दे दिया इन्साफ उसने प्यार की दरखास्त पर
मुझेसिला मिल गया दुनिया का इफ्लाह हो गया /

नक्शा दो जहाँ का देखो, बदल डाला इस इश्क ने
इसमें खुदा इन्सां हो गया ,इन्सां खुदा हो गया /

manu ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
manu ने कहा…

तेरी चाहत की ही सब मेहरबानियाँ है ये की,
कतरा था मै कतरे से कब का दरिया हो गया /

एक पत्थर के टुकड़े को,कीमती याकूत बना दिया
तुमने छुआ प्यार से तो, मै क्या से क्या हो गया /

ek ek lafz dil ko choo jata hai
kuch bhi aur kehne k liye alfaz nai hai hmare pas

raj ने कहा…

तेरी चाहत की ही सब मेहरबानियाँ है ये की,
कतरा था मै कतरे से कब का दरिया हो गया ...boht khoobsurti se ahsaso ko lafjo me banda hai..

"अर्श" ने कहा…

bahot khubsurat rachaan badhaayee sahib... kahaan hain aajkal aapne bhaee jaan koi khabar hi nahi milti aapki... jyada masroofiyat ho gayee hai kya.....sab khariyat to hai naa


arsh

BrijmohanShrivastava ने कहा…

बहुत दिन बाद हाज़िर हो पाया हूँ |प्यार दर्द हो गया और दर्द दबा हो गया |एक छोटी सी बूँद नदी हो गई दोनो जहाँ बदल गए आदमी ईश्वर हो गया और ईश्वर इन्सान हो गया |डर जाता रहा और दिन बागीचा हो गया |पत्थर हीरा हो गया और क्या था क्या हो गया |बहुत सुंदर रचना

*KHUSHI* ने कहा…

नक्शा दो जहाँ का देखो, बदल डाला इस इश्क ने
इसमें खुदा इन्सां हो गया ,इन्सां खुदा हो गया

Awesome...!!!

Babli ने कहा…

बहुत सुंदर शब्दों के साथ दिल को छू लेने वाली आपकी ये रचना मुझे बहुत पसंद आया!

hajji ने कहा…

क्या खूब लिखा है