तुम्हे सोचता हूँ , तो पाता हूँ तुम्हे , अपने ही आस पास -/ तुम्हे छूने लगता हूँ तो टूट जाता है एक और स्वपन -/ ये जो मेरी पलकों पे अनगिनत मोती छुपे हैं इंतज़ार के -/ बस तेरी एक झलक के तलबगार हैं .. और जो मेरे लबों पे आने को बेताब है बरसों से , उस मुस्कराहट को बस तेरे आने का इंतज़ार है -/
मोम की छतरियों से , कड़ी धुप में ...साया बना रहे हो-/ धुप तेज़ होगी छतरियां पिघल जाएँगी एक मुददत और सही , चलो ..... बारिशों का इंतज़ार करते है छतरियों के साए में आने के लिए /