रविवार, जुलाई 27

दिल में रहने वाली गम


दिल में रहने वाली गम जब जवां होगी,
उससे ज्यादा खुबसूरत और बला क्या होगी ,

निकल पड़ते है अश्क जिस दर्द के होने से,
कल वही गम ही मेरे हर गम की दवा होगी ।

आज रो पड़ता हूँ हर शरारत पे तेरी
कल हसूंगा जिस पर वो तेरी अदा होगी।

हो जायेंगे एक हम आग की गवाही में
मेरे सर पे सेहरा होगा तेरे हाथों पे हिना होंगी।

फिर ज़माने में कहीं भी हम नज़र न आयेंगे
गैर बनके ये साँसे जब लापता होंगी ।

3 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

निकल पड़ते है अश्क जिस दर्द के होने से,
कल वही गम ही मेरे हर गम की दवा होगी ।
"jvab nahee hai, gum he gum kee dva hone ka dava kerna itna aasan nahee hai, comendable"

*KHUSHI* ने कहा…

[b]दर्दे दिल की दवा को मस्ती कहा जाम कहा,
कहके शराब कर दिया बदनाम लोगों ने।[/b]
dil ko chu gai ye panktiyaa...

Prakash singh "Arsh" ने कहा…

puri ki puri ghazal hi umdda hai sundar rachana hai ........badhai........


regards
"Arsh"