शनिवार, जुलाई 12






"मोह्हबत करते है"

वो आकर अगर ख्वाबो में ही मोह्हबत करते है ,
अपनी नींदों की हम भी उन पर शहादत करते है
खो जायें कहीं , गहरी नींद में सो जायें कहीं
इस दुनिया के उजालों से चलो बगावत करते है
क्यों नही आता वो सरे -आम मिलने मुझसे
चोर है उसके मन में चलो शिकायत करते है
खवाबो की सेज उसने क्यों चुनी है मेरी खातिर
इस बार की मोहब्बत चलो हकीकत करते है
सोने भी नही देता है अब रात रात भर वो ,
कभी वो हमसे कभी हम उनसे शिकयत करते है
ना लिखो कभी प्यार का कलाम तुम दिलबर
जो दिल में छुपा है तेरे सनम दरियाफ्त करते है
वो आकर अगर ख्वाबो में ही मोह्हबत करते है ,
अपनी नींदों की हम भी उन पर शहादत करते है

2 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

"beautiful composition"

Regards

Prakash singh "Arsh" ने कहा…

खो जायें कहीं , गहरी नींद में सो जायें कहीं
इस दुनिया के उजालों से चलो बगावत करते है


umdda bahot khub.......bahot shararat hai rachana me .....badhai


regard
"Arsh"